नाप-तौल विभाग की कार्यप्रणाली

 

नियंत्रक, नापतौल मध्य प्रदेश के कार्य पर्यवेक्षण में कार्य सम्पादित किया जावेगा। इसके साथ ही मुख्‍यालय के प्रत्येक शाखा के प्रभारी अधिकारी को सौपें गये कार्य के संपादन एवं निराकरण के लिये पूर्ण उत्तरदायित्व रहेगा, तथा कार्यालय में समन्वय बनाये रखने का कार्य भी प्रभारी अधिकारी का रहेगा।

उप नियत्रंक नापतौल, सहायक नियंत्रक एवं निरीक्षक नापतौल अपने-अपने संभाग एवं क्षेत्र के कार्य के निराकरण एवं संपादन के लिये पूर्ण, रूपेण जिम्मेदार रहेंगे।

 

कार्य का विभाजन :-

      नियंत्रक, नापतौल विभाग के विभागाध्यक्ष होने के फलस्वरूप, प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार का प्रयोग करने हेतु प्राधिकृत है। मध्य प्रदेश शासन राजस्व विभाग के ज्ञापन क्रमांक-446/  / ( 8 ) दिनांक 23.07.1958 के द्वारा नियंत्रक को नापतौल विभाग के लिये विभागाध्यक्ष घोषित किया गया है।

नियंत्रक के मुख्‍य कार्य निम्न तीन भागों में विभाजित किया जाता है :

  1. प्रशासनिक
  2. प्रवर्तन
  3. तकनीकी

 

            नाप-तौल का कार्य राष्ट्रीय स्वरूप का है, इसलिये समय-समय पर भारत शासन द्वारा भी इस संबंध में दिशा निर्देश दिये जाते हैं। इस प्रकार नियंत्रक को भारत सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा व्यापक अधिकार एवं कर्तव्य नाप तौल प्रणाली को कार्यान्वित करने हेतु प्रदत्त है।

      नियंत्रक नाप-तौल को प्रदत्त अधिकार एवं कर्तव्य को दृष्टिगत रखते हुए विभाग के कार्य को व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से चलाने के लिए यह आवश्‍यक है कि कार्य का विभाजन किया जाय। विभाग का कार्य बहुत विस्तृत है। संपूर्ण कार्य का विभाजन किया जाना संभव नहीं है। फिर भी मुख्‍य-मुख्‍य विषय को ध्यान में रखते हुए निम्नानुसार किया गया है :-

 

नियंत्रक नाप तौल :-

(1)   बांट तथा माप मानक अधिनियम 1976, बांट तथा माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम 1985 एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों में दिये गये प्रावधानों का क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण।

(2)   विभाग के अंतर्गत योग्य एवं प्रशिक्षित कर्मचारी रखे जाने के उद्देश्‍य से समय-समय आवश्‍यकतानुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।

(3)   समय समय में कानूनी एवं तकनीकी विषयों पर कार्यवाही एवं मार्गदर्शन देना।

(4)   अधीनस्थ अधिकारियों के कार्य का समय समय पर निरीक्षण करना।

(5)   नाप-तौल विभाग के राष्ट्रीय सम्मेलन एवं अन्य कमेटियों में राज्य की ओर से प्रतिनिधित्व करना।

(6)   निरीक्षकों को स्टेम्प एवं सील प्रदान कराने की व्यवस्था करना।

(7)   विभागाध्यक्ष को शासन द्वारा प्रदत्त समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों का उपयोग करना।

 

सयुंक्त नियंत्रक, नाप-तौल ( मुख्‍यालय का कार्य ) :-

(1)   प्रशासकीय एवं वित्तीय मामलों मे शासन एवं नियंत्रक, नाप-तौल द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसार कार्य करना।

(2)   नियंत्रक, नाप-तौल कार्यालय में प्राप्त तकनीकी, लीगल एवं प्रशासकीय स्वरूप के पत्रों का परीक्षण करवाना एवं नियंत्रक नाप-तौल को सहायता करना।

(3)   बांट एवं माप अधिनियमों तथा नियमों के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के अनुरूप कार्य करना।

(4)   अधीनस्थ कार्यालय द्वारा प्राप्त प्रकरणों पर मार्गदर्शन देना।

 

दाशमिक अधिकारी ( मुख्‍यालय ) :-

                  दाशमिक अधिकारी, कार्यालय नियंत्रक, नाप-तौल को तकनीकी मामलों एवं प्रयोगशाला के कार्य में सहायता पहुंचाना है। इनके द्वारा निम्न मुख्‍य कार्य संपादित किये जावेंगे :-

(1)   मुख्‍यालय में स्थापित प्रयोगशाला के प्रभारी के रूप में कार्य संपादित करवाना।

(2)   बांट तथा माप मानक ( प्रवर्तन ) अधिनियमों एवं नियमों में दिये गये प्रावधानों तथा प्रदत्त शक्तियों अनुरूप कार्य संपादित करना।

(3)   नियंत्रक, द्वारा समय-समय पर सौंपे गये कार्य एवं आदेशों के अनुरूप कार्य संपादित करना।

 

मुख्‍यालय निरीक्षक :-

(1)   मुख्‍यालय निरीक्षक विभाग के निरीक्षकों को प्रदाय की जाने वाली मुद्रा एवं ठप्पे का रिकार्ड रखेंगे। निर्धारित समयावधि में मुद्रांक को प्रदाय करना सुनिशिचत करेगें।

(2)   विभिन्न मानक प्रतिमान प्रयोगशाला के रखरखाव के कार्य में दाशमिक अधिकारी को आवश्‍यक सहयोग देना।

(3)   सैम्पल सेटस की जांच एवं संधारण करना।

(4)   विभिन्न प्रतिमानों का निर्धारित समय में सत्यापन का अभिलेख रखना।

(5)   नियंत्रक, द्वारा समय-समय पर प्रदत्त कार्य एवं आदेश के अनुरूप कार्य संपादित किया जावेगा।

 

अधीक्षक ( मुख्‍यालय ) : -

(1)   अधीक्षक का मुख्‍य कार्य कार्यालय में अनुशासन एवं सामन्जस्य बनाये रखना है। कार्यालय में कार्यरत तृतीय श्रेणी लिपिक वर्ग एवं चतुर्थ कर्मचारियों के मध्य अनुशासन बनाये रखना। यह देखेंगे कि कार्यालय के निर्धारित समय में शासकीय कार्य संपादित किया जाय।

(2)   उपस्थिति पंजी रखना एवं पर्यवेक्षण करना कि प्रतिदिन कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित होकर उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर करें तथा कर्मचारी अपना अपना कार्य प्रारंभ कर देवें। बिना अनुमति के कार्यालय, कोई भी कर्मचारी नहीं त्यागे। ( इस ओर ध्यान रखना अधीक्षक का मुख्‍य कर्तव्य है ) कार्यालय को निर्धारित उपस्थिति समय समाप्त होने के बाद उपस्थिति पंजी का परीक्षण करेंगे तथा इस पंजी में कर्मचारियों के अवकाद्गा, भ्रमण में रहने के कारण उपस्थिति पंजी में निम्नानुसार चिन्ह अंकित करें :-

 

            आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश, मेडिकल अवकाश इत्यादि चिन्ह अंकित किये जाये। इसके उपरांत निर्धारित समय में उपस्थिति पंजी नियंत्रक अथवा प्रभारी अधिकारी के सम्मुख प्रस्तुत करें । प्रायः कर्मचारी जोकि कार्यालय में विलंब से उपस्थित होने के आदि हो उसके संबंध में प्रभारी अधिकारी को सूचित करें। विलंब से उपस्थित होने वाले कर्मचारियों के नाम के सम्मुख लाल स्याही से क्रास का निशान अंकित किया जाय।

 

(3)   कार्यालय की सामान्य व्यवस्था संबंधी कार्य का उत्तरदायित्व रहेगा।

(4)   नियंत्रक, नाप-तौल द्वारा दिये गये आदेशानुसार शासन का कार्य का पर्यवेक्षण करेंगे।

(5)   कार्यालय में प्राप्त होने वाली समस्त डाक को प्राप्त करना एवं वितरण की व्यवस्था करना। आवश्‍यक पत्रों को तुरन्त निराकरण की कार्यवाही पूर्ण करना। डाक कार्यालय में प्राप्त होते ही प्राप्त होने का दिनांक उल्लेखित करें एवं हस्ताक्षर करें। महत्वपूर्ण पत्र में लाल स्याही से तैयार ध्वज पिन लगाकर भेजें तथा यह देखना कि इस प्रकार का मार्क किया गया पत्र सर्वप्रथम प्रस्तुत किया जाय। समस्त डाक नियंत्रक, अथवा प्रभारी अधिकारी को अवलोकन हेतु भेजना। तत्पश्‍चात आवक लिपिक को देना व आवक पंजी में प्रविष्टि उपरान्त संबंधितों को वितरित करना ।

(6)   अधीक्षक समय -समय पर प्रत्येक लिपिक का टेबिल निरीक्षण करें एवं देखे कि कार्य लंबित नहीं होने पावें। प्रत्येक सप्ताह में प्राप्त पत्र नियंत्रक के सम्मुख आदेश हेतु प्रस्तुत हो जावें। प्रत्येक सप्ताह में लंबित पत्रों की सूची प्रभारी अधिकारी / नियंत्रक को प्रस्तुत करना।

(7)   अधीक्षक, को प्रत्येक शाखा का निरीक्षण प्रत्येक छः माह में करना चाहिये। निरीक्षण करने के उपरान्त निरीक्षण टीप नियंत्रक को प्रस्तुत करें। इस निरीक्षण कार्य के लिये नियमित रोस्टर, बनाया जाय एवं उसको ध्यान में रखते हुए निरीक्षण कार्य संपादित किया जाय।

(8)   अधीनस्थ कर्मचारियों की समस्त नस्तियां अधीक्षक के माध्यम से प्रस्तुत की जावेगी। कार्यालय के कार्य में नियंत्रण बनाये रखना एवं स्टाफ को प्रत्येक शाखा के कार्य के लिये मार्गदर्शन देना।

 

यह देखा जावे कि नियमों एवं आदेशों का पालन किया जा रहा है। महत्वपूर्ण नस्ती में परीक्षण कर टीप अधीक्षक को देवें। संबंधित लिपिक अपनी टीप के प्रति उत्तरदायी रहेंगे। अधीक्षक यदि प्रस्ताव एवं टीप में त्रुटियां पाते हैं, तो नस्ती लिपिक को वापिस की जावेगी एवं त्रुटियों को दूर करने हेतु निर्देश स्पष्ट रूप से लिखकर वापिस की जावेगी। प्रत्येक प्रकरण में उचित विशलेषण दिया जाये जिससे निर्णय लेने में कठिनाईयां न होने पावें। प्रत्येक प्रकरण की टीप मुख्‍य विषयक विशलेषण इस प्रकार प्रस्तुत किया जावें कि स्पष्ट संदर्भ उल्लेखित हो एवं पृष्ठ अंकित हो। यह अधीक्षक का मुख्‍य कर्तव्य एवं दायित्व है कि कार्यालय का कार्य सामान्य रूप से नियमित संपादित किया जाये।

 

सीनियर आडीटर :- आडिट शाखा का प्रभारी होगा तथा नियंत्रक द्वारा समय-समय पर सौंपा गया कार्य संपादित करेगा।

 

सहायक ( मुख्‍यालय ) :-

(1)   सहायक प्रत्येक शाखा के प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे। प्रत्येक सहायक का यह कर्तव्य होगा कि वे उनके माध्यम से प्रस्तुत होने वाली नस्तियों का परीक्षण करें एवं यह देखें की टीप विभागीय निर्देशों एवं नियमों के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है। यदि कोई त्रुटि पायी जाती है, तो आवश्‍यक सुझाव देकर टीप में सुधार करायें। सहायक नस्तियों के परीक्षण के समय मुख्‍य बिन्दुओं का विशलेषण करें एवं स्पष्ट टीप संक्षिप्त में प्रस्तुत करें जिससे निर्णय लेने में कोई असुविधा न होवें।

 

(2)   शाखा में प्राप्त होने वाली डाक वितरण तुरन्त कराना एवं महत्वपूर्ण पत्रों का निराकरण त्वरित गति से कराने का उत्तरदायित्व रहेगा। शाखा में कार्यरत तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के बीच कार्य का सामन्जस्य बनाये रखना। शाखा में कार्यरत कर्मचारियों के लिये समय - समय पर कार्य विभाजन किया जायेगा। उसके अनुरूप कार्य संपादित करना।

(3)   समय-समय में दिये गये आदेशानुसार शाखा के अतिरिक्त कार्य संपादित करना।

 

नियंत्रक कार्यालय की शाखाएं :-

मुख्‍यालय में निम्नानुसार शाखाऐं रहेगीं। प्रत्येक शाखा के द्वारा किया जाने वाला कार्य का विवरण संक्षिप्त में उल्लेखित किया गया है :-

  1. स्थापना शाखा :-

(1)   विभागीय जांच एवं शिकायतों का परीक्षण।

(2)   राजपत्रित अधिकारियों का स्थापना सें संबंधित कार्य एवं सेवा पुस्तिका का संधारण।

(3)   निरीक्षक, नाप-तौल के स्थापना से संबंधित समस्त कार्य।

(4)   तृतीय श्रेणी लिपिक वर्ग एवं चतुर्थ श्रेणी की संस्थापना से संबंधित समस्त कार्य एवं सेवा पुस्तिका का रख रखाव।

(5)   विभाग के अधिकारियों एवं निरीक्षकों के प्रशिक्षण संबंधी पत्र व्यवहार।

(6)   समय-समय में सौंपा गया अन्य विविध कार्य।

 

  1. लेखा शाखा :-

(1)   विभाग का बजट तैयार करना।

(2)   व्यय एवं आय के लेखा पर पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण।

(3)   विभागाध्यक्ष, नियंत्रण अधिकारी होने के कारण प्रत्येक व्यय एवं आय के लेखे का परीक्षण उपरान्त आवशयक स्वीकृति जारी की जाना तथा अधीनस्थ कार्यालय के लेखा पर नियंत्रण रखना।

(4)   लेखा से संबंधित अन्य समस्त कार्य संपादित किया जायेगा।

  1. (ब). लेखा परीक्षण शाखा ( आडिट शाखा ) :-

(1)   महालेखाकार एवं शासन द्वारा लेखा से संबंधित आपत्तियों का निराकरण कराना।

(2)   महालेखाकार, संचालक कोष एवं लेखा, म.प्र., के निरीक्षण टीप का पालन प्रतिवेदन तैयार करना एवं अधिकारियों को निरीक्षण हेतु प्रस्तुत करना।

 

(3)   मुख्‍यालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों के निरीक्षण टीप का परीक्षण एवं पालन कराना।

(4)   निरीक्षक नाप-तौल कार्यालय का, निर्धारित रोस्टर के अनुसार, वर्ष में एक बार आडिट ( निरीक्षण ) करना एवं आडिट नोट का पालन कराना।

(5)   सीनियर आडीटर का मुख्‍य दायितव रहेगा कि शाखा का कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चल रहा है उस पर पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण रखना।

(6)   समय-समय में अन्य कार्य जो सौंपा जावेगा उसको संपादित करना।

 

  1. सामान्य शाखा :-

(1)   मुख्‍यालय के स्टोर एवं स्टाक का रख रखाव का उत्तरदायित्व रहेगा।

(2)   स्‍टेशनरी, फार्म, प्रयोगशाला उपकरणों, का क्रय करना, पंजियों एवं नस्तियां व्यवस्थित रखना।

(3)   कार्यालय की सामान्य व्यवस्था पर देखरेख।

(4)   समय-समय में कार्य सौपा जायेगा उसे संपादित करना।

(5)   भवन संबंधी समस्त नस्तियों का संधारण।

 

  1. प्रर्वतन शाखा :-

(1)   नाप-तौल संबंधी समस्त प्रर्वतन अधिनियम एवं नियमों में दिये गये प्रावधानों का पालन अधिनस्थ कार्यालयों द्वारा किया जा रहा है, परीक्षण करना। इस संबंधी प्राप्त होने वाले पत्रों का परीक्षण करने उपरान्त सुझाव सहित निराकरण हेतु प्रस्तुत करना।

(2)   नाप-तौल प्रणाली का प्रचार एवं प्रसार संबंधी पत्र व्यवहार करना।

(3)   विभाग के प्रवर्तन कार्य का परीक्षण करना एवं नियंत्रण रखना तथा आवश्‍यक सुझाव प्रस्तुत करना।

(4)   भारत सरकार एवं राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले पत्रों का परीक्षण करना एवं आवश्‍यक कार्यवाही हेतु सुझाव प्रस्तुत करना।

(5)   अधिनियम के संबंध में भारत सरकार से प्राप्त सुझाव का परीक्षण करना, कार्यवाही हेतु प्रस्तुत करना।

(6)   विभाग का अन्य कार्य समय - समय में प्रदत्त किया जावेगा उसे संपादित करना।

 

  1. अनुज्ञप्ति शाखा :-

(1)   निर्माता, विक्रेता एवं सुधारक अनुज्ञप्ति प्रदान करने संबंधित पत्र व्यवहार करना एवं अभिलेख तैयार करना तथा आवश्‍यक प्रविष्ठियां करना।

(2)   अनुज्ञप्तियों के संदर्भ में अन्य आवश्‍यक कार्य संपादित किया जावेगा।

(3)   समय-समय में अन्य कार्य प्रदत्त किया जावेगा उसे संपादित किया जाना अनिवार्य होगा।

(4)   सैम्पल सेट प्राप्त कर मुख्‍यालय निरीक्षक से जांच रिपोर्ट प्राप्त करें। प्रकरण में आदेश उपरांत अनुज्ञप्ति प्रदान कराना। ( निर्माता अनुज्ञप्तिधारी  के मामलों में )

 

  1. अभियोजन शाखा :-

(1)   अधीनस्थ संभागीय कार्यालयों से प्राप्त प्रकरणों में निराकरण तथा मार्गदर्शन बावत्‌ नियमों तथा निर्देशों के तहत परीक्षण करना एवं आदेश प्राप्त करना। 

(2)   विभाग के अभियोजन प्रकरणों का अभिलेख संधारित करना।

(3)   अभियोजन कार्य में दिशा निर्देश जारी कराना।

(4)   अभियोजन संबंधी अन्य सौंपा गया कार्य।

 

  1. अभिलेखागार :- मुख्‍यालय के रिकार्ड को सुरक्षित रखना। नियमानुसार बिनष्टिकरण की कार्यवाही संपादित कराना।

 

  1. 8. जावक शाखा :- मुख्‍यालय से बाहर भेजी जाने वाली डाक की पंजी रखना एवं सर्विस पोस्टेज का लेखा रखना। आवश्‍यक पंजियों में प्रविष्ठयां पूर्ण करना।

 

  1. आवक शाखा :- मुख्‍यालय में प्राप्त होने वाली डाक को पंजीबद्ध करना। शाखाओं में भेजना एवं आवश्‍यक निर्धारित पंजियों में प्रविष्ठयां करना।

 

  1. टायपिस्ट/कम्‍प्‍यूटर आपरेटर :- कम्प्यूटर आपरेटर/टायपिस्ट का कर्तव्य होगा कि मशीनों के रखरखाव एवं सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखेगें। प्राप्त होने वाले प्रकरणों को मुद्रांकित करना एवं प्रतिदिन किये गये कार्य का विवरण पंजी में दर्ज करना तथा पंजी अधीक्षक को प्रस्तुत कर हस्ताक्षर प्राप्त करेगें। कार्यालय में एक से अधिक टायपिस्ट है इसलिये विभाजन के अनुसार प्रत्येक टायपिस्ट कार्य संपादित करेंगे।

 

  1. स्टेनो (मुख्‍यालय) :-

(1)   नियंत्रक, नाप-तौल के आदेश के अनुरूप कार्य संपादित करेंगे। गोपनीय चरित्रावली को सुरक्षित रखना एवं आवश्‍यक पत्र व्यवहार इस संदर्भ में नियंत्रक नाप-तौल द्वारा दिये गये आदेशानुसार प्रस्तुत करना।

(2)   नियंत्रक, नाप-तौल द्वारा समय-समय में दिये गये आदेशों का पालन करते हुए कार्य संपादित किया जावेगा।

 

 

  1. पुस्तकालय / वाचनालय :-

(1)   कार्यालय में प्राप्त होने वाले समस्त पुस्तकों/प्रकाशनों, गजट आदि का संधारण करना एवं आगन्‍तकों को कार्यालयीन अभिलेख वाचन हेतु उपलब्ध कराना।

(2)   पुस्तकालय प्रभारी पुस्तकालय का समय पर खुलना एवं बंद होना तथा आगुन्तकों को उपलब्ध सामग्री उपलब्ध कराना सुनिशिचत करेगें।

 

  1. संग्रहालय :- नाप-तौल से संबंधित पूर्व प्रचलित सामग्री सुरक्षित रखी जावेगी।

 

 

उप-नियंत्रक / सहायक नियत्रंक नाप-तौल :-

 

1.)    राज्य शासन एवं नियंत्रक नाप-तौल द्वारा समय - समय पर प्रदत्त वैधानिक प्रशासकीय एवं वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करेंगे। प्रत्येक उपनियंत्रक/सहायक नियंत्रक अपने संभाग के अंतर्गत बांट तथा माप मानक (प्रर्वतन) अधिनियम 1976 एवं बांट तथा माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 एवं उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करेंगे।

(1)   निरीक्षकों के कार्यो का पर्यवेक्षण करना। बाजार के निरीक्षण के अवसर पर व्यापारिक संस्थानों के नाप-तौल उपकरण एवं पैकेजों की जांच की जावेगी साथ ही साथ अन्य संस्थानों का भी निरीक्षण किया जावेगा।

(2)   निरीक्षकों के शिविर तथा फील्ड वर्क का आकस्मिक निरीक्षण किया जायेगा। जिससे निरीक्षको द्वारा प्रवर्तन अधिनियम एवं उसके अंतर्गत बने नियमों के अंतर्गत किये जा रहे कार्य का समुचित पर्यवेक्षण किया जा सके।

(3)   निर्माता, सुधारक, विक्रेता के संस्थानों का समय-समय पर निरीक्षण करना।

(4)   टेक्नीकल एवं प्रशासकीय बिन्दूओं में निरीक्षकों को सलाह देना।

(5)   निर्माता, विक्रेता एवं सुधारक के लिये अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन प्राप्त होने पर उनका परीक्षण करना एवं अनुशंसा सहित नियंत्रक, को भेजना।

(6)   निरीक्षक द्वारा प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा एवं परीक्षण करना आवश्‍यकता अनुसार अथवा आदेशानुसार निर्धारित तिथि को नियमित मुखयालय भेजना।

(7)   आवश्‍यकतानुसार प्रदर्शनी आयोजित कराना मैट्रिक प्रणाली के उपयोग हेतु प्रसार प्रचार करना।

(8)   स्थानीय जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं पुलिस विभाग से संपर्क बनाये रखना जिससे आवश्‍यकता पड़ने पर निरीक्षक को मदद मिल सकें।

(9)   भारत सरकार के नाप-तौल विभाग के अधिकारियों के भ्रमण एवं निरीक्षण के अवसर में आवश्‍यक सहयोग देना।

2.)    निरीक्षकों के कार्य का पर्यवेक्षण तथा आवश्‍यक सलाह देना।

2.)   निरीक्षकों के कार्य का पर्यवेक्षण तथा आवश्‍यक सलाह देना।

3.)    निरीक्षकों के कार्यालय का वार्षिक निरीक्षण तथा कार्य की समुचित व्यवस्था करना तथा अपने क्षेत्र के अंतर्गत प्रवर्तन कार्य की प्रगति की समीक्षा करना तथा समय-समय पर भ्रमण करना।

4.)    क्षेत्र में नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण करना।

5.)   अभियोजन के प्रकरणों में नियमानुसार प्रक्रिया पूर्ण करना एवं निर्धारित सीमा के अंतर्गत निराकरण की कार्यवाही करना।

6.)    समस्त निर्धारित प्रशासकीय, वित्तीय, टेक्नीकल एवं कानूनी कार्यवाही के प्रतिवेदन तैयार कर मुख्‍यालय भेजने की व्यवस्था करना।

7.)    नियंत्रक, नाप-तौल द्वारा समय-समय पर दिये गये आदेशों का पालन करना।

8.)    आवश्‍यक अभिलेख एवं रिकार्ड की पंजियों, निर्देशों एवं नियमों के अंतर्गत रखने की पूर्ण व्यवस्था करना।

 

कार्यालय उप-नियंत्रक / सहायक नियंत्रक, नाप-तौल

उप-नियंत्रक/सहायक नियंत्रक नाप-तौल कार्यालयों में निम्नानुसार लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के पद हैं :-

  1. अधीक्षक/सहायक ग्रेड-1
  2. लेखापाल (संभागीय)/सहायक ग्रेड-2
  3. सहायक ग्रेड-3

            उप-नियंत्रक/सहायक नियंत्रक, नाप-तौल द्वारा कार्य का विभाजन किया जावेगा। अधीक्षक/सहायक ऐसे कार्यालय में पर्यवेक्षण के अतिरिक्त अन्य कोई भी संपादित कराया जा सकेगा।

            उक्त कर्मचारियों का कार्य व दायित्व नियंत्रक कार्यालय के स्टाफ के कार्यो में उल्लिखित दिशा निर्देशों के अनुरूप ही होगा।

 

निरीक्षक नाप-तौल :- निरीक्षक नाप-तौल, जिला एवं तहसील स्तर में पदस्थ हैं। प्रत्येक निरीक्षक अपने पदस्थ क्षेत्र में निम्नानुसार कार्य संपादित करेंगे :-

  1. बांट तथा माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम 1985 एवं उसके अंतर्गत बने नियमों के अनुरूप प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करेंगे। एवं उसमें उल्लेखित कार्यो तथा उत्तरदायित्वों का निर्वाह करेंगे साथ ही स्टेन्डर्ड वेट्स एण्ड मेजर्स 1976 के अनुसार प्रदत्त शक्तियों के अनुरूप कार्य संपादित करना।
  2. कार्यकारी मानक उपकरण एवं प्रयोगशाला हेतु प्रदत्त उपकरण के रखरखाव के लिए उत्तरदायी रहेंगे, तथा प्रदत्त मुद्रा एवं ठप्पे को सावधानी पूर्वक रखने की जिम्मेदारी रहेगी।
  3. क्षेत्र के अंतर्गत उपयोग में लाये जाने वाले बांट, कांटे, नाप एवं माप इत्यादि उपकरणों का नियमों में दिये गये प्रावधान के अनुसार समयावधि में मुद्रांकन एवं पुनः सत्यापन का कार्य संपादित किया जावेगा।
  4. समय-समय पर व्यापारिक संस्थान के मालिक एवं अन्य व्यक्ति जो कि उपकरणों का उपयोग करते हैं, उनको निर्धारित अवधि की समाप्ति के पूर्व नोटिस देना तथा उनके उपकरणों का पुनः सत्यापन करना।
  5. सत्यापन एवं अन्य शुल्क की वसूली करना एवं कोषालय में जमा करना।
  6. सत्यापन के लिये बांट एवं माप का प्रतिमान (परीक्षण माप / परीक्षण वाट) तैयार करना।
  7. बांट एवं माप का प्रदत्त अधिकार के अनुसार समायोजन करना।
  8. समयावधि में बांट, माप, पैकेज कमोडिटीज का अपने क्षेत्र के अंतर्गत आकस्मिक निरीक्षण करना।
  9. आकस्मिक निरीक्षण कर त्रुटिपूर्ण एवं नियम विरूद्ध प्रचलित उपकरणों / पैकेजों को जप्त करना एवं नियमानुसार कार्यवाही करना।
  10. निर्धारित अवधि में निर्माता, विक्रेता एवं सुधारक अनुज्ञप्तिधारियों का निरीक्षण एवं अभिलेखों की जांच करना। नियंत्रक द्वारा दिये गये आदेशों के अनुरूप प्रतिवेदन भेजना।
  11. अनुज्ञप्ति प्रदत्त करने हेतु आवेदन पत्रों का अपने अभिमत के साथ अग्रेषित करना।
  12. न्यायालय में अभियोजन के प्रकरण से प्रस्तुत करना एवं पैरवी करना।
  13. अपने क्षेत्र के अंतर्गत भ्रमण हेतु कार्यक्रम तैयार करना एवं अनुमोदन अनुसार भ्रमण करना।
  14. आवश्‍यक अभिलेख एवं पंजियों को पूर्ण कर रखना।
  15. दिये गये आदेशों के अनुसार प्रतिवेदन वरिष्ठ कार्यालय को भेजना।
  16. अन्य प्रशासकीय कार्य जो उन्हें प्रदत्त किया जाय, उसे पूर्ण करना एवं पालन करने का उत्तरदायित्व निर्वहन।
  17. स्थानीय अधिकारियों की मीटिंग में सम्मिलित होना तथा समय-समय पर जिला प्रशासन से संपर्क बनाये रखना।
  18. नियंत्रक द्वारा समय-समय पर दिये गये आदेशों का पालन करना।

 

कार्यालय निरीक्षक नाप-तौल का स्‍टॉफ :-

1.)    निरीक्षक कार्यालय के लिये निम्‍नानुसार स्‍टॉफ है :-

(1)   सहायक वर्ग-3           

(2)   श्रम सहायक             

(3)   चौकीदार ( जहां पद स्वीकृत है )

 

सहायक वर्ग - 3 का कार्य :- 1.) पंजीयों का संधारण करना तथा समय पर प्रविष्ठियां करना इसके अतिरिक्त लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को समय-समय पर कार्य सौंपा जावेगा उसके अनुसार कार्य संपादित करना होगा।

2.)    गोपनीय व निरीक्षक के नाम से प्राप्त लिफाफे यथास्थिति में तथा शेष समस्त प्राप्त डाक को खोलकर लिपिक निरीक्षक के सम्मुख प्रस्तुत करेगा। पत्रों को आवक करेगा तथा निरीक्षक के निर्देशानुसार उनका निराकरण करेगा।

3.)    कार्यालय नस्तियों को व्यवस्थित रूप से रखेगा।

4.)    समस्त प्रतिवेदन समय पर वरिष्ठ कार्यालय को भेजने का ध्यान रखेगा।

5.)    कैशबुक :-  वरिष्ठ कार्यालय से प्राप्त ड्राफ्ट एवं मनी रसीदों से प्राप्त राशि को नियमित रूप से प्रतिदिन प्रविष्ठी की जावे व निरीक्षक के हस्ताक्षर प्राप्त करें।

6.)    बैंक ड्राफ्ट रजिस्टर :- समस्त बैंक ड्राफ्टों की प्रविष्टि नियमित रूप से की जावे एवं निरीक्षक के हस्ताक्षर प्राप्त करें।

7.)    नगद संग्रह पंजी :- मुख्‍यालय पर जारी की गई सभी मनी रसीदों की प्रविष्टि प्रतिदिन की जावें। शिविर में निरीक्षक स्वयं इस की प्रविष्टि करेंगें।

8.)    आवक पंजी :- कार्यालय में प्राप्त समस्त पत्रों को उसी दिन आवक किया जाना चाहिये।

9.)    जावक पंजी :- कार्यालय से भेजे जाने वाले प्रत्येक पत्र को जावक कर उस पर जावक नंबर एवं दिनांक अंकित किया जाना चाहिये।

10.)  डाक टिकट पंजी :- कार्यालय से भेजे गये पत्रों पर व्यय किये गये डाक टिकिटों को लेखा जोखा तैयार कर प्रतिदिन निरीक्षक से हस्ताक्षर लिये जावें।

11.)  स्टाक रजिस्टर :- नाशवान तथा अनाशवान सामग्री की प्रविष्टियां रजिस्टर में नियमित रूप से की जाना चाहिये तथा निरीक्षक के उस पर हस्ताक्षर लिये जावे। लेखन सामग्री तथा अन्य स्‍टेशनरी का लेखा जोखा तैयार कर प्रविष्टि नियमित रूप से की जाना चाहिये।

12.)  कार्यालय का लिपिकों के बीच कार्य विभाजन वरिष्ठ निरीक्षक/मुख्‍यालय निरी. द्वारा किया जावेगा। कार्यालय के कार्य के संचालन का उत्तरदायित्व निरीक्षक का ही होगा, निरीक्षक द्वारा समय-समय पर दिये गये आदेशों का पालन करना अनिवार्य होगा ।

13.)  शिकायत पंजी सिटीजन चार्टर पंजी/सिटीजन चार्टर्र पत्र

14.)  सूचना के अधिकार 2005 भी पंजी, आय पंजी, शिविर पंजी, जब्त उपकरण की पंजी, अभियोजन पंजी, प्रयोग शाला पंजी, आवक पंजी, शिकायत पंजी, जावक उपकरण की पंजी अभियोजन पंजी, प्रयोगशाला पंजीयों का संधारण करेगा।

      

विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी :-  नाप-तौल विभाग में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के द्वारा समय-समय पर सौंपा गया कार्य संपादित किया जावेगा।

 

मुख्‍यालय :-

अ :- मुख्‍यालय के दफ्तरी का मुख्‍य कार्य निम्नानुसार रहेगा :-

  1. फोटो कापी/डुप्लीकेटिग मशीन के रख-रखाव की व्यवस्था करना।
  2. स्टेंशिल निकालना एवं संबंधित शाखा को जिम्मेदारी से सौंपना।
  3.          समय समय में सौपा गया कार्य संपादित किया जावेगा।
  4. दफ्तरी :- रिकार्ड रूम के कार्य में सहायता करना।
  5. जमादार:- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर नियंत्रण एवं उनकी ड्‌यूटी समय-समय में अन्य सौंपा गया कार्य संपादित किया जायेगा। कार्यालय की सफाई आदि की व्यवस्था करना माली स्वीपर के कार्य पर नियंत्रण रखना । समय समय पर अन्य सौंपा गया कार्य संपादित किया जावेगा।
  6. भृत्य :- कार्यालय का कार्य निर्देशानुसार संपादित करेगा।
  7. चौकीदार :- कार्यालय के पूर्ण सुरक्षा के लिये चौकीदार जिम्मेदार रहेगा। अन्य अतिरिक्त कार्य समय समय में सौंपा जायेगा। उसे भी सम्पादित किया जावेगा।

कार्यालय उप / सहायक नियंत्रक :- प्रयोगशाला परिचालक कम दफ्तरी जिस कार्यालय में पदस्थ है,  निम्नानुसार कार्य संपादित किया जावेगा।

  1. कार्यालय के प्रयोगशाला के रखरखाव एवं सफाई इत्यादि की व्यवस्था करना।
  2. डूप्लीकेटिंग मशीन की व्यवस्थित एवं सफाई इत्यादि का कार्य संपादित करना।
  3. स्टेंशिल निकालना एवं संबंधित शाखा को सोंपना।
  4. समय-समय पर कार्य जो सौंपा जावेगा उसे संपादित करना होगा।

 

भृत्य :- कार्यालय के कार्य को समय-समय पर दिये आदेशों के अनुरूप संपादित किया जावेगा।

चौकीदार :- चौकीदार कार्यालय की पूर्ण सुरक्षा के लिये जिम्मेदार रहेगा, इसके अतिरिक्त अन्य कार्य समय-समय पर सौंपा जावेगा।

 

कार्यालय निरीक्षक, नाप-तौल :- जहां श्रम सहायक एवं चौकीदार पदस्थ हैं, निम्नानुसार कार्य संपादित करेगें :-

  1. निरीक्षक के साथ भ्रमण पर जावेगा। शिविर संपादित करावेगा तथा नोटिस वितरण करेगा।
  2. निरीक्षक के निर्देशानुसार कार्य किया जावेगा।

चौकीदार :-   1. निरीक्षण, कार्यालय की सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी रहेगी ।

  1. आवश्‍यकता अनुसार अन्य कार्य समय-समय में सौंपा जावेगा एवं संपादित किया जावेगा।

 

नाप - तौल प्रवर्तन एवं निरीक्षण :- नाप-तौल विभाग (विधिक माप विज्ञान) द्वारा मुख्‍य रूप से निम्‍नानुसार कार्य किये जाते है:-

(1) उपभोक्ताओं का नाप-तौल से होने वाले शोषण से संरक्षण।

(2) व्यापार, व्यवसाय, औद्योगिक उत्पादन तथा मानव सुरक्षा में उपयोग में आने वाले नाप-तौल उपकरणों की शुद्धता बनाये रखना।

(3) नाप-तौल उपकरण की संवेदनशील प्रयोगशालाओं का संधारण।

(4) नाप-तौल उपकरणों का सतयापन, मुद्रांकन तथा प्रमाणीकरण हेतु विभिन्न स्थानों पर शिविरों का आयोजन।

(5) संस्थाओं की जांच व त्रुटिकर्ता के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर नाप-तौल अधिनियमों/नियमों के अंतर्गत कार्यवाही करना।

(6) नाप-तौल उपकरणों के निर्माता, विक्रेता व सुधारकों को अनुज्ञप्तियां प्रदान करना।

(7) भारत शासन द्वारा प्रवर्तित बांट और माप मानक अधिनियम 1976 तथा बांट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम 1985 तथा उसके अंतर्गत विभिन्न नियमों का क्रियान्वयन।

विभाग से संबंधित उक्त कार्य करने हेतु :-

(1)   अधिकारियों एवं निरीक्षकों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से समय-समय पर निरीक्षण।

(2)   नाप-तौल उपकरणों का समय पर सत्यापन एवं मुद्रांकन।

(3)   सत्यापन एवं मुद्रांकन शिविरों का आयोजन।

(4)   आवश्‍यकता अनुसार जनजागरण शिविरों का आयोजन किया जाना।

 

प्रवर्तन कार्य का निरीक्षण हेतु भ्रमण :-

  1. निरीक्षक :- माह में दस दिवस,
  2. 2. उप-नियंत्रक/सहायक नियंत्रक :- माह में सात दिवस प्रर्वतन एवं शिविर कार्य का निरीक्षण।
  1. संयुक्त नियंत्रक/नियंत्रक :- आवश्‍यकतानुसार निरीक्षण करेगें।

 

नोटः- जिस माह में पुनः सत्यापन शिविर आयोजित होगे, उस माह में कम से कम तीन दिवस निरीक्षक भ्रमण करेगें।

 

            प्रत्येक माह निरीक्षण का कार्यक्रम अग्रिम बनाकर स्वीकृति के लिये भेजा जाना चाहिये, ऐसे कार्यक्रम कम से कम 15 दिवस पूर्व स्वीकृति करने वाले अधिकारी के पास पहुंच जाना चाहिये। भ्रमण स्वीकृत होने पर ही सामान्य रूप से भ्रमण करना चाहिये। आकस्मिक भ्रमण की स्वीकृति भ्रमण के पश्‍चात् ली जा सकती है, किन्तु इनकी स्वीकृति आवश्‍यक रहेगी, भले ही बाद में ली जावे। भ्रमण के समय की गई जांच एवं निरीक्षण के समय पाई गई त्रुटियों व उपलब्धियों के बावत्‌ रिपोर्ट प्रेषित की जानी चाहिये, जो आगामी माह की 5 तारीख तक निरीक्षक की रिपोर्ट उप नियंत्रक को एवं उप/सहायक नियंत्रक की रिपोर्ट 10 तारीख तक नियंत्रक कार्यालय में प्राप्त हो जाना चाहिये।

 

पुनः सत्यापन शिविर आयोजित करने बावत्‌    :-

पुनः सत्यापन/मुद्रांकन कार्य के लिये शिविर योजनाबद्ध व सुनियोजित ढंग से आयोजित किये जाने चाहिये। प्रत्येक नाप-तौल निरीक्षक सत्यापन मुद्रांकन शिविर आयोजित करने के पूर्व अपने संभाग के उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक को 15 दिवस पूर्व पत्र लिखकर शिविर किस दिनांक से किस दिनांक तक आयोजित किया जाना है, इसकी सूचना भेजें। इसमें यह भी दर्शाया जावे कि कितने व्यापारी आहूत किये गये हैं। शिविर से प्राप्त होने वाली अनुमानित आय क्या है, गत शिविर में कितने व्यापारी आये थे एवं कितनी आय हुई थी। शिविर आयोजित करने की सूचना शिविर प्रारंभ होने के पूर्व अपने क्षेत्र के अनुज्ञप्तिधारियों को भी दी जाना चाहिये। शिविर प्रारंभ होने के पूर्व शिविर की सीमा में आने वाले समस्त व्यापारियों को शिविर की सूचना यथा समय दी जानी चाहिये। शिविर अनुमोदित कार्यक्रम के अनुसार निर्धारित समय एवं स्थान पर आयोजित करना चाहिये। शिविर आयोजित करना निरीक्षक के लिये कानूनी अनिवार्यता है, अतः इस संबंध में निरीक्षक को विशेष ध्यान देना चाहिये।

 

अभियोजन :-

  1. नाप-तौल अधिनियमों एवं नियमों के अन्तर्गत बनाये गये अभियोजन प्रकरण।
  2. अपराध प्रकरणों के प्रकार

 

अभियोजन प्रकरण दो प्रकार के होगें, प्रथम राजीनामा के तथा दूसरे न्यायालयीन कार्यवाही के।

(1)   राजीनामा के प्रकरण - राजीनामा के प्रकरण राजीनामा योग्य धाराओं में दर्ज प्रकरण (राजीनामा पश्‍चात् तीन वर्ष तक राजीनामा नहीं किया जा सकता है ।

(2)   न्यायालयीन प्रकरण -  राजीनामे के अभाव में या जिनमें राजीनामे का प्रावधान न हो वह प्रकरण न्यायालय में लगाया जावेगा।

 

  1. अभियोजन प्रकरण का विवरण नाप-तौल अधिनियमों एवं बने नियमों का उल्लंघन होने पर निरीक्षक त्रुटिकर्ता के विरूद्ध अभियोजन हेतु प्रकरण बनायेगा।

 

अभियोजन प्रकरणों के साथ संलग्न अभिलेख :- अभियोजन प्रकरणों के साथ निम्न लिखित अभिलेख संलग्न किये जायेंगे -

  1. फार्वडिंग लेटर
  2. केस डायरी (निर्धारित प्रारूप)
  3. जप्ती पत्र
  4. पंचनामा
  5. राजीनामा आवेदन यदि दिया गया है
  6. गवाहों के बयान जहां आवश्‍यक हो
  7. अन्य दस्तावेज

 

अभियोजन प्रकरणों के निराकरण की अवधि - ( निरीक्षक द्वारा )

अभियोजन प्रकरण कायम करने के दिनांक से अधिक से अधिक 15 दिवस के अन्दर निरीक्षक द्वारा उप नियंत्रक /सहायक नियंत्रक को प्रस्तुत करना चाहिये। भ्रमण अवधि शामिल नहीं होगी ।

 

उपनियंत्रक/सहायक नियंत्रक द्वारा कार्यवाही :-

उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक को न्यायालयीन कार्यवाही के प्रकरणों का निराकरण सात दिन में करना चाहिये । राजीनामा के प्रकरणो का अधिकतम 15 दिवस में निराकरण करना चाहिये। जिनमें राजीनामा अप्राप्त है उन्हें प्राप्त कर प्राप्ति के अधिकतम 7 दिन के अन्दर निराकरण होना चाहिये। राजीनामा आदेश की सूचना सभी संबंधितो को दी जानी चाहिये। सामान्य रूप से प्रकरण बनाने के 30 दिवस अधिकतम के अन्दर प्रकरण वापिस निरीक्षक कार्यालय पहुंच जाना चाहिये एवं निरीक्षक 15 दिवस में राजीनामा जमा न होने पर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत करेगें ।

अभियोजन प्रकरण के साथ संलग्न केस डायरी, हस्तगत पत्रक एवं पंचनामें में निम्न लिखित जानकारी समाविष्ट की जावेगी :-

(अ) केस डायरी :- अभियुक्त का नाम, पिता का नाम, आयु, अभियुक्त का स्थाई एवं अस्थाई पता, व्यवसाय, संस्था में उसकी स्थिति जैसे मालिक, हिस्सेदार या नौकर, हस्तगत उपकरण, अपराध की धारा, अपराध कायम करने का दिनांक, व समय निरीक्षक का नाम, घटना एवं की गई विवेचना एवं निष्कर्ष, का विवरण इत्यादि ।

(ब) हस्तगन पत्रक - ( जब्ती मेमों/सुपुदर्गी नामा ) :- अभियुक्त तथा उपस्थिति का पूर्ण नाम तथा पता नियमों का स्पष्ट उल्लेख, जप्त उपकरण या सामग्री का नाम पूर्ण विवरण सहित लिखा जावेगा। गवाहों का पूर्ण, पता अंकित किया जावेगा। आवश्‍यकता अनुसार जप्त सामग्री सुपदर्गी में सौपी जा सकती है।

(स) पंचनामा :-   पंचनामा में कार्यवाही का पूर्ण विवरण होगा तथा अभियुक्त का नाम, पिता का नाम, आयु, पता एवं व्यवसाय का विवरण होगा, उसमें कम से कम दो पंचो के हस्ताक्षर पूर्ण पते के साथ लिये जावेंगे।

(द) राजीनामा का आवेदन पत्र :- राजीनामा के आवेदन पत्र, निर्धारित प्रपत्र में तथा अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकार करने पर बिना दबाव के एवं स्वेच्छा से करने का उल्लेख कर दिया जावेगा। जिन प्रकरणों में टाइम लिमिट खत्म हो रहा है, उनका निरीक्षण विशेष ध्यान रखकर निराकरण करवाये। उपनियंत्रक/सहायक नियंत्रक भी इसकी जानकारी पंजी में रखेंगे तथा कार्यवाही करेंगे।   न्यायालय का निर्णय होने पर उसकी सूचना निरीक्षक द्वारा उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक को भेजी जावेगी, जिसमें न्यायालय द्वारा दिये गये दण्ड या दोषमुक्त की जानकारी होगी। निरीक्षक अपने कार्यालय में रखी गई पंजी में ऐसी जानकारी तत्काल अंकित करेंगे, साथ ही दोषमुक्ति की स्थिति में न्यायालय के निर्णय की सत्य प्रतिलिपि के साथ प्रकरण में अपील की जाना हो तो कारणों सहित औचित्य दर्शाते हुए न्यायालयीन निर्णय की प्रमाणित सत्यप्रतिलिपि प्राप्त होने के एक सप्ताह के अन्दर निरीक्षक अपनी रिपोर्ट उप नियंत्रक सहायक नियंत्रक को भेजेगा।

 

निरीक्षक अपराध प्रकरण मे जप्त नाप, तौल उपकरण या वस्तु अपने कार्यालय में रखेंगे। यदि वस्तु नाशवान हो तो नियमानुसार उसका निराकरण करेंगे। अपराध प्रकरण बनाते समय यदि अभियुक्त हस्तगन पत्रक पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहता है तो पंचनामें में यह स्थिति स्पष्ट लिखी जायेगी।

यदि अभियुक्त अपराध कायम करने के पश्‍चात् कहीं अन्यत्र चला जाता है और उसका पता उपलब्ध नहीं होता हैं तो निरीक्षक ऐसे अभियुक्त के निकट के कम से कम दो व्यापारियों से पंचनामा बनवाकर प्रकरण की कार्यवाही हेतु भेजेंगे। राजीनामा जमा होने की सूचना राशि जमा होने के तीन दिन के अन्दर उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक को भेजेंगे।

अपराध प्रकरणों का लक्ष्य कम से कम प्रतिमाह प्रति निरीक्षक के लिये बीस प्रकरण रखा गया है। उसके अनुसार प्रत्येक निरीक्षक को बीस अपराध प्रकरण, प्रत्येक माह में बनाना आवश्‍यक होंगे, इसमें पी. सी. आर. के प्रकरण भी सम्मिलित है।

            हस्तगत उपकरण या सामाग्री अपराधी को वापस न लौटाने की दशा में उसका विवरण पंजी में रखेगा, जिसका प्रारूप निम्नलिखित होगा :-

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सरल क्रमांक  अभियुक्त का नाम   अपराध    हस्तगत   जप्त उपकरण या      विशेष

                             प्रकरण    पत्र क्र.    सामग्री का विवरण

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(1)               (2)         (3)         (4)         (5)            (6)

 

अनुज्ञप्ति

  1. नाप-तौल उपकरणों का निर्माण, विक्रय अथवा सुधार कार्य करने के लिये इच्छुक व्यक्तियों को नियमों के अन्तर्गत विभाग से अनुज्ञप्ति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बिना वैध अनुज्ञप्ति के नाप-तौल उपकरणों का निर्माण, विक्रय या सुधार करना दण्डनीय अपराध है।
  2. नाप-तौल उपकरणों के निर्माण, विक्रय या सुधार करने के इच्छुक व्यक्ति नियमों में निर्धारित फार्म में निरीक्षक के माध्यम से आवेदन करेगा।
  3. निरीक्षक, कार्यालय में अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन प्राप्त होने से 7 से 15 दिन के अन्दर (सिटीजन चार्टर अनुसार) पूर्ण जांच उपरान्त उप नियंत्रक, सहायक नियंत्रक को स्पष्ट अभिमत सहित भेजेगा।
  4. उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक ऐसे आवेदन की जांच 7 से 15 दिन में पूर्ण करके (सिटीजन चार्टर अनुसार) प्रकरण अपनी अनुशंसा के साथ नियंत्रक को भेजेगा। ऐसी अनुज्ञप्ति जो उनके स्तर से प्रदाय की जाना है, प्रदाय करेंगे।
  5. नियंत्रक, नाप-तौल कार्यालय से 7 दिवस में ऐसे आवेदन पत्र की जांच कर निर्धारित शुल्‍क जमा होने पर अनुज्ञप्ति प्रदाय की कार्यवाही की जावेगी।
  6. नियंत्रक, उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक एवं निरीक्षक स्तर पर अनुज्ञप्ति की पंजियां रखी जावेगी। जिसमें अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन पत्र प्राप्त करने, नवीनीकरण, निरस्तीकरण की प्रविष्टयां अंकित की जायेगी। तथा संबंधित अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित की जायेगी ।
  7. प्रत्येक निरीक्षक प्रत्‍येक छः माही में एक बार एवं उप नियंत्रक, सहायक नियंत्रक भी आवश्‍यकता अनुसार अनुज्ञप्तिधारी के अभिलेखों का निरीक्षण करेगा। निरीक्षण की रिपोर्ट उपनियंत्रक/सहायक नियंत्रक को भेजी जायेंगी। अधिकारी रिपोर्ट के आधार पर तथा स्वयं के द्वारा की गई जांच के आधार पर अनुज्ञप्ति की नवीनीकरण या निरस्तीकरण की अनुशंसा करेगा उसमें इसका उल्लेख अवश्‍य किया जावेगा ।
  8. अनुज्ञप्तिधारी द्वारा, नाप-तौल अधिनियमों एवं नियमों के प्रावधानों का तथा नियंत्रक द्वारा समय-समय पर दिये गये निर्देशों का उल्लंघन करने पर निरीक्षक एवं उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक ऐसी त्रुटियों का प्रतिवेदन स्वयं के द्वारा की गई जांच के आधार पर नियंत्रक को अपनी स्पष्ट अनुशंसा के साथ भेजेंगे ।
  9. अनुज्ञप्ति की अवधि एक कलेण्डर वर्ष होगी। अनुज्ञप्ति के नवीनीकरण हेतु 15 नवम्बर तक प्राप्त आवेदन निरीक्षक 30 नवम्बर तक उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक को भेजेंगे। उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक 15 दिसम्बर अंत तक, समस्त प्रकरण वरिष्ठ कार्यालय को भेज देंगे। 7 किसी अनुज्ञप्तिधारी द्वारा वर्ष समाप्ति के पूर्व नवीनीकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत न करने पर अनुज्ञप्ति नवीन वर्ष हेतु प्रभावहीन मानी जावेगी। निरीक्षक ऐसे अनुज्ञप्तिधारी का प्रतिवेदन तुरन्त भेजेंगे ।
  10. एक बार अनुज्ञप्ति निरस्त हो जाने पर पुनः नवीनीकृत नहीं हो सकेगी। अनुज्ञप्तिधारी द्वारा नवीन अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन करने पर उसमें व्यक्त औचित्य के आधार पर विचार किया जा सकेगा।
  11. प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी को प्रतिमाह में किये गये कार्य का प्रतिवेदन आगामी माह की पांच तारीख तक निरीक्षक को भेजना अनिवार्य होगा। कोई कार्य न किये जाने पर 'निल' प्रतिवेदन भेजना होगा।
  12. प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी अपने प्रतिदिन के निर्माण, विक्रय या सुधार कार्य का विवरण विभाग द्वारा निर्धारित पंजी में रखेगा।
  13. निर्माता स्वयं के द्वारा निर्मित उपकरणों की जांच हेतु रखे गये उपकरण, विक्रेता निजी उपयोग में लाये जाने वाले उपकरण तथा सुधारक बदले में दिये जाने वाले उपकरणों का पुनः सत्यापन नियमानुसार करवायेगा।
  14. प्रत्येक निर्माता या विक्रेता विक्रय किये गये नाप-तौल उपकरणों बावत्‌ पूर्ण, जानकारी बिल बुक या केश मेमों, में रखेगा। जिसमें उपकरणों का मोनोग्राम व सत्यापन की तिथि का उल्लेख करेगा।
  15. सुधारक सुधार हेतु व्यापारियों से प्राप्त उपकरणों के लिये प्राप्ति बिल तीन प्रतियों में जारी करेगा। प्रथम प्रति संबंधित व्यापारी को दी जावेगी। द्वितीय प्रति निरीक्षक को देगा तथा तृतीय प्रति अपने पास रखेगा। बिल में व्यापारी का नाम व पता, उपकरणों का अभिधान (क्षमता) संख्‍या इत्यादि अंकित करेगा ।
  16. सुधारक बिना उपकरण प्राप्त किये न तो रसीद जारी करेगा और न पारिश्रमिक शुल्‍क ही प्राप्त करेगा।
  17. सुधारक द्वारा छपाई गई बिल बुक का रिकार्ड निरीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत करेगा एवं बिल बुकों को निरीक्षक प्रमाणित करेगा।
  18. प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी अपने कार्य स्थल पर एक सहजगोचर स्‍थान पर अपनी अनुज्ञप्ति प्रदर्शित करेगा।
  19. विक्रेता अनुज्ञप्तिधारी अपने परिसर से अन्यत्र स्थल जैसे मेला आदि में भी नाप-तौल उपकरणों का विक्रय कर सकेगा किन्‍तु इस हेतु उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक, नियंत्रक नाप-तौल से अग्रिम अनुमति प्राप्त करना होगी।
  20. सुधारक को अपने जिले में जिसमें सुधार कार्य करने हेतु उसे अनुज्ञप्ति प्रदत्त है, लगने वाले पुनः सत्यापन शिविर में सुधार करने की पात्रता होगी।

सुधारक की उपस्थिति कार्यस्थल पर अनिवार्य होगी, किन्तु अपवाद यह होगा कि, भारी उपकरणों जैसे, पेट्रोल पंप, वे-ब्रिज, बेडग मशीन आदि का सुधार कार्य करने वाली संस्थाओं के मालिक की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। इन संस्थानों के सुधार कार्य विभाग द्वारा अधिकृत अनुज्ञप्ति धारी अथवा उसके अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा किया जायेगा, जिसकी स्वीकृति विभाग द्वारा ली जाना अनिवार्य होगा।

  1. अनुज्ञप्ति खो जाने या नष्ट हो जाने पर अनुज्ञप्तिधारी, अनुज्ञप्ति की दूसरी प्रति हेतु आवेदन, शपथ-पत्र के साथ शासन द्वारा समय-समय पर निर्धारित राशि जमाकर प्रस्तुत करेगा, जिसमे अनुज्ञप्ति खो जाने या नष्ट होने के कारणों सहित कथन करेगा। ऐसा आवेदन पत्र संबंधित निरीक्षक को तुरन्त प्रस्तुत करेगा। निरीक्षक उसको अपने अभिमत सहित उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक के माध्यम से नियंत्रक को भेजेगा। नियंत्रक द्वारा आवेदन में व्यक्त कारणों से संतुष्ट होने पर ही अनुज्ञप्ति की दूसरी प्रति नियमानुसार प्रदाय की जावेगी।
  2. सीटिजन चार्टर में उल्लेखित अवधि का यथावत्‌ पालन किया जाना चाहिये।

 

 

कार्यालयीन कार्य का निरीक्षण : -

  1. नियंत्रक/उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक ,अधीनस्थ कार्यालयों का निरीक्षण करने हेतु रोष्टर बनायेंगे। जिसके अनुसार निर्धारित अवधि में निरीक्षण में किया जावेगा। रोष्टर नियंत्रक द्वारा स्वीकृत कराया जायेगा।
  2. नियंत्रक, उप नियंत्रक तथा सहायक नियंत्रक अपने अधीनस्थ कार्यालयों, का कार्यालय के लेखा संबंधी तथा अन्य अभिलेखों का आवश्‍यक रूप से वर्ष में एक बार विस्तृत जांच करेंगें तथा जांच रिपोर्ट संबंधित कार्यालय को भेजेंगे (उप नियंत्रक तथा सहायक नियंत्रक द्वारा जांच रिपोर्ट की प्रति नियंत्रक को भेजना अनिवार्य होगा )
  3. मुख्‍यालय की लेखा शाखा का निरीक्षण नियंत्रक अथवा उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा वर्ष में एक बार किया जावेगा। संभागीय कार्यालयों के लेखा का निरीक्षण कार्यालय निरीक्षण के समय नियंत्रक द्वारा किया जावेगा ।
  4. यह निरीक्षण निर्धारित रोष्टर के अनुसार होगा किन्तु आवश्‍यकता पड्ने पर इसका आकस्मिक निरीक्षण भी किया जावेगा
  5. उप नियंत्रक/सहायक नियंत्रक, नियंत्रक के निर्देद्गाानुसार सौंपे गये कार्यो का निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन करेगें।

 

                  भौतिक सत्यापन में अधिकारी की नियुक्ति अन्तसंभागीय की जावेगी।